कृष्णा बिल्डकॉन क्रेशर सील होने के बाद भी हो रहा है संचालित

कृष्णा बिल्डकॉन क्रेशर सील होने के बाद भी हो रहा है संचालित


रायगढ़ माइनिंग विभाग जानकर भी बन रहा है अनजान


 माइनिंग विभाग चुप क्यों ,आखिर किसका मिल रहा है संरक्षण ?


सारंगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत गुड़ेली में एक क्रेशर मालिक की दादागिरी इतनी है कि क्रेशर सील होने के बाद भी क्रेशर संचालित कर रहा है , लेकिन माइनिंग विभाग है कि इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा है । ऐसा प्रतीत हो रहा है कि माइनिंग विभाग के अधिकारी मोटे लिफाफे में बंध गए हैं । इसकी जानकारी माइनिंग विभाग को नहीं है ऐसा हो ही नहीं सकता , क्योंकि समाचार पत्रों में कुछ दिन पहले ही खबर प्रकाशित हुई थी कि क्रेशर सील होने के बाद भी धडक्के से संचालित हो रहा है । हम बात कर रहे हैं गुडे़ली स्थित कृष्णा बिल्डकॉन क्रेशर उद्योग की जहां लीज एरिया से बाहर में क्रेशर स्थापित कर शासन की आंखों में धूल झोंक कर क्रेशर संचालित कर रहा था । जिसकी शिकायत माइनिंग विभाग को मिली जिसके बाद खनिज विभाग के अधिकारियों ने इस क्रेशर को सील कर दिया था । वही इस क्रेशर पर रायगढ़ माइनिंग विभाग की खुली छूट नजर आ रही है । अगर माइनिंग विभाग कोई क्रेशर को सील कर दे तो मजाल है कि कोई उस क्रेशर को चला दे , लेकिन यहां तो कृष्णा बिल्डकॉन क्रेशर दिन में भी धडक्के साथ क्रेशर संचालित हो रही है । समझ से परे तो यह है कि उस क्रेशर की लीज अवधि खत्म हो चुकी है फिर भी यहाँ क्रशिंग होकर माल गाड़ी में लोड होकर निकल रही है । आखिर यहाँ किसका रॉयल्टी लग रहा है ? क्या यहाँ से बिना रॉयल्टी के गाड़ियां सारंगढ़ की ओर फर्राटे भर रही है , जिसको माइनिंग विभाग जान कर भी अंजान बना हुआ है । या कहें कि अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी कहानी चल रही है और रायगढ़ में बैठे माइनिंग विभाग के अधिकारी घोड़े बेच कर सो रहे हैं । साहब ! कम से कम सरकारी तनख्वा लेते हैं तो जरा इधर भी गौर कीजिए या फिर मोटे लिफाफा लेकर आपका ईमान तो नहीं बिक गया - ऐसा हम नहीं कह रहे हैं यहां के लोग-बाग में चर्चा का माहौल बना हुआ है ।

वहीं जानकारों की मानें तो यह क्रेशर एक तरह से अवैध नजर आ रहा है , क्योंकि यह क्रेशर नाले से लगा हुआ है । अब पता नहीं पर्यावरण विभाग और राजस्व विभाग द्वारा इनको कहां से परमिशन दे दिया गया था । हालांकि इस मामले में सही जांच हो जाए तो इस खेल में बड़े बड़े अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं । क्रेशर संचालित करने से पहले यहां रहे पटवारी और आर आई की मिली भगत से यह पूरा खेल खेला गया होगा , क्योंकि पटवारी और आ गई द्वारा नाप - जोककर सीमांकन के लिए आवेदन दिया गया होगा , लेकिन बड़े रसूखदार होने के चक्कर में इसे पटवारियों का भी खुला संरक्षण मिला होगा इसीलिए तो माइनिंग विभाग ने कुछ दिन पहले क्रेशर को सील कर दिया है , लेकिन यह रहे बड़े रसूखदार द्वारा धडक्के से क्रेशर संचालित हो रही है । इनकी लीज है और ना ही भंडारण उसके बाद भी माइनिंग विभाग और राजस्व विभाग द्वारा खुला संरक्षण देकर इस क्रेशर को संचालित करवा रही है ऐसा ही कहना होगा । क्योंकि समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित पहले ही अंग में दिखाया गया था कि अनिल केडिया सील होने के बाद भी क्रेशर संचालित कर रहा है , इसके बावजूद भी माइनिंग विभाग जान कर भी अंजान बनी हुई है ।

*सबके निगाहें टिकी है सहायक खनिज अधिकारी ए बारीक पर*


यूं तो रायगढ़ जिले के खनिज विभाग में धुरंधर खनिज अधिकारी के नाम से प्रसिद्ध हैं सहायक खनिज अधिकारी ए बारीक । आज तक इनकी जहां भी पोस्टिंग हुई है उस क्षेत्र में अगर इनकी गाड़ी भी वहां से गुजरती है तो बड़े-बड़े खनन माफियाओं के हाथ पैर फूल जाते हैं , लेकिन जब से अनिल केडिया की बात आ रही है तब से यह खनिज अधिकारी चुप बैठे हैं या कहें कि काम में व्यस्त हैं , लेकिन जहां तक क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है कि रायगढ़ में बैठे खनिज अधिकारी ए बारीक इस पर कार्यवाही करेंगे - ऐसा हम नहीं कह रहे हैं इस क्षेत्र के ग्रामीण बता रहे हैं । अब तो आगे सबकी निगाहें बारीक साहब पर टिकी है । इस पर कार्यवाही होगी या फिर मामले को बड़े रसूखदार होने के चक्कर में छोड़ देंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा ।

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