SDM ने पकड़ीं 10 अवैध मुरुम गाड़ियां, कार्रवाई से पहले ही घिर गई खनिज टीम; 80 गुंडों के सामने प्रशासन बेबस!
तिल्दा-नेवरा में खनिज अधिकारियों पर दबंगों का हमला, जबरन छुड़ाकर ले गए जब्त वाहन; SDM की भूमिका पर भी उठे सवाल अफरोज ख्वाजा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग प्रदेश प्रवक्ता
मेघा तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर/तिल्दा-नेवरा(छत्तीसगढ़) - राजधानी रायपुर से लगे तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में अवैध मुरुम खनन के खिलाफ शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई देखते ही देखते कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना में बदल गई। आरोप है कि एसडीएम द्वारा अवैध उत्खनन में संलिप्त लगभग 10 वाहनों को पकड़े जाने के बाद जब खनिज विभाग की टीम वैधानिक कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची, तब दर्जनों की संख्या में पहुंचे दबंगों ने न केवल अधिकारियों को घेर लिया बल्कि जब्त वाहनों को बलपूर्वक छुड़ाकर ले गए। पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और अवैध खनन माफियाओं के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 22 में अवैध मुरुम उत्खनन की शिकायत मिलने पर एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान लगभग 10 वाहनों को पकड़ा गया, जिनमें कुछ मुरुम से भरे हुए थे जबकि कुछ खाली वाहन भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि वाहनों को पकड़ने के बाद एसडीएम ने रायपुर जिला खनिज विभाग को सूचना देकर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए टीम बुलवाई।
खनिज विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची और जब्त वाहनों को थाना परिसर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी अचानक लगभग 70 से 80 लोगों की भीड़ वहां पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भीड़ में शामिल लोग बेहद आक्रामक थे और उन्होंने खनिज अधिकारियों तथा कर्मचारियों को चारों तरफ से घेर लिया। आरोप है कि अधिकारियों के साथ गाली-गलौज की गई, धमकियां दी गईं और दबाव बनाकर जब्त किए गए वाहनों को छुड़ाकर मौके से भगा दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जिस कार्रवाई की शुरुआत एसडीएम ने की थी, उसी कार्रवाई के दौरान हालात बिगड़ने पर प्रशासनिक नेतृत्व मौके पर नजर नहीं आया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि कार्रवाई के संवेदनशील मोड़ पर एसडीएम की अनुपस्थिति ने खनिज विभाग की टीम को असहाय स्थिति में छोड़ दिया। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
घटना यहीं समाप्त नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक वाहन छुड़ाकर ले जाने के बाद खनिज विभाग की टीम जब दोपहर के भोजन के लिए एक रेस्टोरेंट में पहुंची, तब वही दबंग तत्व वहां भी पहुंच गए। आरोप है कि वहां भी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई तथा खुलेआम दादागिरी दिखाते हुए भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। इस दौरान खनिज विभाग के कर्मचारी स्वयं को असुरक्षित महसूस करते रहे।
खनिज विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि स्थिति थोड़ी और बिगड़ जाती तो अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। घटना को विभागीय अधिकारियों ने गंभीर सुरक्षा चूक और प्रशासनिक चुनौती माना है। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि सरकारी कार्रवाई करने पहुंचे अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला उस विधानसभा क्षेत्र का है जिसे प्रदेश के राजस्व मंत्री का क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में अवैध खनन माफियाओं द्वारा खुलेआम सरकारी कार्रवाई को चुनौती देना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अधिकारियों के साथ ही इस तरह का व्यवहार हो रहा है तो आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून के राज की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे कौन लोग हैं जिन्होंने सरकारी टीम को घेरकर जब्त वाहन छुड़ा लिए? क्या इनके पीछे किसी रसूखदार और प्रभावशाली नेटवर्क का संरक्षण है? और यदि नहीं, तो फिर अब तक इन पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? तिल्दा-नेवरा की यह घटना केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकार को खुली चुनौती देने का मामला बन चुकी है। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार और प्रशासन इस दुस्साहस पर कितनी सख्त कार्रवाई करते हैं।
इनका कहना हैं...
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेश प्रवक्ता अफरोज ख्वाजा ने अपने बयान में कहा कि यदि प्रशासन ही गुंडो के साथ होगा तो फिर राजस्व की चपत को कोई रोक नहीं लगाई जा सकती, जिन लोगों ने यह कृत किया है उन पर एफआईआर दर्ज हो और प्रशासन उनसे शख़्ती के साथ बर्ताव करें जिससे दोबारा कोई भी इस तरह का कृत्य करने से पहले सौ बार सोचे, कानून का खौफ और प्रशासन की शख़्ती ही इस पर लगाम लगा सकती है।
अफ़रोज़ ख़्वाजा
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग प्रदेश प्रवक्ता रायपुर छत्तीसगढ़