अभामामहिला सम्मेलन का द्वितीय प्रांतीय अधिवेशन संपंन

अभामामहिला सम्मेलन का द्वितीय प्रांतीय अधिवेशन संपंन

सारंगढ़ । 17अक्टूबर को राजधानी रायपुर में अभामा महिला सम्मेलन का प्रांतीय बैठक का आयोजन रायपुर के सिंगापुर सिटी में किया गया । जिसमें 18 शाखाओं ने सहभागिता दर्ज करायी । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती शारदा लखोटिया का आत्मीय स्वागत  उमंग व एवन शाखा रायपुर की बहनों के द्वारा की गई । कार्यक्रम के  विशिष्ट अतिथि के रूप में  प्रांतीय पूर्व अध्यक्ष श्रीमती रेखा महमिया, पूर्व अध्यक्ष गीता अग्रवाल , पूर्व अध्यक्ष  ललिता सांवरिया ,  पूर्व अध्यक्ष सुधा अग्रवाल , कार्यक्रम की अध्यक्षता  प्रांतीय अध्यक्ष  उषा अग्रवाल के द्वारा की गई । रायपुर शाखा द्वारा  समस्त अतिथियों का स्वागत तुलसी गमला देकर किया गया । इस कार्यक्रम में प्रांतीय प्रकल्प प्रमुख शीला गर्ग ,उमा छपारिया ,अरूणा अग्रवाल , अंजु अग्रवाल उपस्थित रही तथा प्रांतीय संपादिका सुमन अग्रवाल भी उपस्थित रही । गर्व का विषय था कि - इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़़ प्रदेश के डिप्टी कलेक्टर शारदा अग्रवाल की गरिमामय  उपस्थिति रही ।

कार्यक्रम का श्री गणेश  रायपुर शाखा के द्वारा गणेश वंदना नृत्य से की गई । रायपुर उमंग शाखा के द्वारा  स्वागत डांस की प्रस्तुति की गई । उमंग व एवन शाखा के द्वारा ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  लघु नाटिका एवं नृत्य की प्रस्तुति  की । 18 शाखा की बहने ताली की गड़गड़ाहट से कार्यक्रम का उत्साह वर्धन कर रहे थे । अकलतरा शाखा के द्वारा लघु नाटिका प्रीवेडिंग रोकथाम समाज का अभिशाप की प्रस्तुती की । रायगढ़ शाखा द्वारा पर्यावरण बचाओ प्लास्टिक हटाओ, कपड़े झोला अपनाओ । उमंग रायपुर शाखा एवन रायपुर शाखा के आतिथ्य में यह कार्यक्रम हुआ । राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शारदा लखोटिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि - हमारी सभी वरिष्ट बहनों के अथक परिश्रम से यह वट वृक्ष तैयार हुआ है । सभी ने गांव-गांव जाकर के बहनों को तैयार किया तब जाकर शाखा विस्तार हुआ , प्रदेश बने । कोविड-19 का कहर पूरे विश्व में तांडव मचा रखा है , लेकिन इस समय में भी हमने हार नहीं मानी । जूम टेक्नोलॉजी के द्वारा 18 जून से हम आपस में रोज मिलने लगे । रोज नए-नए वेबीनार एक माला में मोतियों की तरह हम सबको पिरोया है । अंचल की प्रमुख बहने अपने-अपने प्रदेशों को सुचारू रूप से देख रही हैं । पाठ प्रकल्प प्रमुख बहनों के बारे में उन्होंने कहा कि - आपकी क्षमता अद्वितीय है । सब अपने-अपने फील्ड की क्वीन हैं । संध्या जी ने रक्तदान का एप्रिसियेशन एवार्ड दिलवा कर तो कमाल कर दिया । हमारी 19 प्रदेशों की बहनों में जो लीडरशिप, क्वालिटी है । मैंने अच्छे से पहचाना उन सबका टीमवर्क मजबूत है । कोविड-19 में भी सभी बहनों ने जो सहयोग ग्रुप बनाकर काम किया है मैं इसके लिए उनकी आभारी हूं । 

छत्तीसगढ़़ प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती उषा अग्रवाल कहा कि - कन्या पूजन वाले देश में स्त्रियों के खिलाफ लगातार बढ़ते अपराध एक कानूनी समस्या है ? वही एक बड़ी सामाजिक समस्या भी है ? कि - हम नैतिक पतन की किस डगर पर बढ़ चले हैं । दुनिया की कोई पुलिस व कानून तब तक इस तरह के अपराध पर अंकुश नहीं लगा सकते , जब तक हम इन अपराधों की मानसिकता वाले समाज पर अंकुश ना लगाएं । कहते हैं कि - भ्रमण पर निकले नारद मुनी ने एक बार रावण की लंका की संपदा व ऐश्वर्य देख कर भविष्यवाणी की थी कि - रावण का पतन निश्चित है ? क्योंकि देश में मधुशाला व आयुध शाला का तो निर्माण हुआ है , लेकिन चरित्र निर्माण शाला नहीं बनी है । संपादिका सुमन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि - पर्व त्योहारों का सिलसिला प्रारंभ हो चुका है । वर्षा का आगमन , सावन की हरियाली , तीज की धूम , सावन के झुले , मेले , बोल बम के नारे से हर गली , हर शहर गूंज उठा है । त्यौहार हमें अवसर देते हैं , आपसी मेलजोल का एवं अपनी संस्कृति के अनुरूप समाज के हित मैं कुछ करने का । आज के इस मशीनी युग में , भागती हुई जिंदगी की दौड़ में , हमारे पास समय ही नहीं होता कि - हम जीवन में छाई कुरीतियों पर चिंतन कर सकें । सैकड़ों साल से चली आ रही तर्क हीन परंपराओं पर कुछ आत्म विवेचन कर उन्हें नई दिशा प्रदान करने का प्रयास कर सके । जब यह रीति रिवाज बनाए गए थे , तब परिस्थितियां कुछ और थी । आज 21 वी सदी में भी हम उन रूढ़ि , परंपराओं को आंखें मूंदे अपनाते चले आ रहे हैं । यह अपने आप में गहन चिंता का विषय है । अब वक्त आ गया है हम स्वयं जागृत हैं । कुछ समय निकालकर आत्म चिंतन करें , ताकि आने वाली पीढ़ी को एक नई सुनियोजित एवं संगठित दिशा प्राप्त हो । 

पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष रेखा महमिया ने कहा कि - धर्म और यश की रक्षा करती है, वही उत्तम सहधर्मी है। धर्म की रक्षा करोगे तो कल्याण होगा और यश की रक्षा करोगे तो लोक में सम्मान मिलेगा । धर्म और यश एक दूसरे के पूरक हैं । धर्म के कारण यश होता है और यश मिलने पर धर्म चलता है । वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों का पतन तेजी से हो रहा है । लोगों में ईश्वर के प्रति आस्था का अभाव होता जा रहा है । यही नहीं मनुष्य मनुष्य के बीच अविश्वास की खाई चौड़ी होती जा रही है । इस समस्या के कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं , पहला कारण तो यही कि - लोगों में चरित्र हीनता बढ़ी है , दूसरा नैतिकता घटी है , तीसरा कारण यह कि - लोगों का ईश्वर के प्रति विश्वास घटा है ।  संस्कारों के अभाव में नैतिकता का गिरना स्वाभाविक है । नीति से गिरा हुआ समाज या व्यक्ति कभी भी उन्नति नहीं कर सकता । आज के दिखावे के युग में आयोजन तो बहुत बड़े बड़े हो रहे हैं , किंतु उनके मानवीय सरोकार नहीं है । आध्यात्मिकता के बिना भौतिक उत्थान का कोई महत्व नहीं , मन की पवित्रता के बिना तन की पवित्रता संभव नहीं है । इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पूर्व अध्यक्ष ललिता सांवरिया और सुधा अग्रवाल के द्वारा 5 प्रकल्प पर संक्षिप्त मगर सविस्तार वर्णन प्रस्तुत किए । छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी शाखा अध्यक्षों ने अपने द्वारा कराए गए कार्यों की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की । कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार वितरण एवं अल्पाहार की व्यवस्था रायपुर की उमंग शाखा और एवन शाखा द्वारा की गई थी ।

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