रायगढ़ माइनिंग को चला रहा है एक प्राइवेट ड्राइवर
*माइनिंग के जानकारी को लीक करने में है माहिर*
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के माइनिंग विभाग में एक ड्राइवर है जो सरकारी नहीं प्राइवेट है , लेकिन यहाँ इसी का बोलबाला है । अगर माइनिंग में कोई भी काम कराना हो तो इससे जाकर मिलो और चिड़ावा दो तब आपका काम हो जाएगा । इस ड्राइवर की मनमर्जी यूं ही नहीं थम रही यहाँ तो जितने भी अवैध उत्खनन करने वाले , ट्रांसपोर्टर और क्रेशर मालिक सभी के पास इस प्राइवेट ड्राइवर का मोबाइल नंबर है । इस ड्राइवर को महीने देकर साहब लोगों की लोकेशन पूछी जा रही है और लोकेशन लीक होने पर साहब लोगों के ना तो गाड़ी हाथ में आ रहा है और ना ही कुछ कार्यवाही कर पा रहे हैं । इस ड्राइवर की मनमानी चरम सीमा पर है ।
यह ड्राइवर साहब लोगों का पर्सनल ड्राइवर है और माइनिंग विभाग में इसी का बोलबाला चल रहा है । इस पर साहब लोगों का संरक्षण इतना है की किसी को भी नहीं हिसाब रहा है । अगर माइनिंग विभाग कहीं दौरे में गाड़ी पकड़ने जाए तो यह ड्राइवर साहब लोगों से आगे रहता है और जिस सेठ का मंथली आ जाए उस सेठ को फोन लगाकर कह देता है कि आज साहब लोग दौरे में निकल रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं इसका एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें यह ड्राइवर कह रहा है कि अभी साहब लोग दौरे में निकल रहे हैं थोड़ा देख लेना और गाड़ी मत निकालना । ऐसे पर्सनल ड्राइवर पे माइनिंग विभाग के अधिकारी इतना क्यों मेहरबान हैं ?आखिर काली कमाई का काला खेल इस ड्राइवर से तो ना जुड़ा हो ? अगर इसके मोबाइल के सभी नंबर को ट्रेस किया जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा । अब देखते हैं आने वाला वक्त ही बताएगा कि अब इस पर क्या होगा । माइनिंग विभाग के अधिकारी इस पर मेहरबान रहेंगे या इस पर कुछ कार्यवाही होगी ।
*पहले था रायपुर में अब आया है रायगढ़ , लाए हैं एक ऐसे अधिकारी जिन पर अभी तक नहीं लगा है दाग*
जी हां ! हम सही कह रहे हैं यहां एक ऐसे खनिज अधिकारी की पर्सनल ड्राइवर बन कर आया है जिन पर आज तक कोई दाग नहीं लगा है । यह अधिकारी तो इसको खुद अपना ड्राइवर नहीं बनाते हैं , लेकिन वहां बैठे और दो अधिकारी इनको पर्सनल ड्राइवर बना कर ले जाते हैं और यह काले कारनामों को या कहें कि काले कमाई को यहीं से आदान-प्रदान होते हों ।
