देर रात तक डटे रहे शायरी प्रेमी वाह वाह में गुजरी रात
बिलग्राम के मोहल्ला मैदानपुरा में स्थित बाल कल्याण प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में शनिवार की रात एक भव्य और यादगार मुशायरे का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन का संयोजन मशहूर शायर असगर बिलग्रामी ने किया, जिनके नेतृत्व में यह महफिल शायरी और अदब की दुनिया में एक नया रंग लेकर आई। रात नौ बजे शुरू हुआ यह मुशायरा देर रात तक चलता रहा, जिसमें स्थानीय शायरों के साथ-साथ बाहर से आए नामी शायरों ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। सर्व प्रथम नगर के पूर्व वरिष्ठ अध्यापक श्री राम नारायण शुक्ला को अंगवस्त्त पहनाया गया और रसलीन सम्मान से नवाजा गया।
मुशायरे में इलाकाई शायरों जैसे इमरान बिलग्रामी, कमर बिलग्रामी, बिस्मिल बिलग्रामी, हुजूर बिलग्रामी के अलावा रियाज बरहक मल्लानवी, शादाब गुहर मल्लानवी, इरशाद कानपुरी, खलील फरीदी रायबरेलवी, डॉ. ज़ुबैर सिद्दीकी संदीलवी और दावर रज़ा संदीलवी जैसे मशहूर शायरों ने शिरकत की। प्रत्येक शायर ने अपने अनूठे अंदाज और गहरे भावों से भरे शेरों के जरिए महफिल को और रंगीन बनाया। श्रोताओं की तालियों और वाह-वाही ने पूरे आयोजन को जीवंत कर दिया, और हर शेर पर लोग झूम उठे। बिस्मिल बिलग्रामी ने “आता नहीं है चैन दिले बेकरार को, बल खाए जब से देख लिया जुल्फे यार को” पढ़कर प्रेम की बेचैनी को शब्दों में पिरोया। हुजूर बिलग्रामी ने “तेरे सजदों में नेहा उल्फते यज़दानी हो, चश्मे आलम के लिए सजदों का गुलदान न बन” से आध्यात्मिक और दार्शनिक गहराई को छुआ। खलील फरीदी रायबरेलवी ने “बेवफा तेरा ख्याल आएगा अक्सर लेकिन, दिल की दहलीज तक आएगा चला जाएगा प्रेम और विरह के दर्द को व्यक्त किया। डॉ. ज़ुबैर सिद्दीकी संदीलवी ने “मैंने माना कि वीरान हैं कोठियां, मेरी आवाज़ तो लौटनी चाहिए” से जीवन की खामोशी और उम्मीद को बयां किया। इस मुशायरे में हर शायर ने अपनी रचनाओं के जरिए अलग-अलग भावनाओं को छुआ, जिसमें प्रेम, विरह, आध्यात्म, सामाजिक सरोकार और जीवन के विविध रंग शामिल थे। श्रोता देर रात तक अपनी जगह पर डटे रहे और शायरों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। यह मुशायरा न केवल शायरी प्रेमियों के लिए एक साहित्यिक दावत साबित हुआ, बल्कि बिलग्राम की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को भी और समृद्ध करने में कामयाब रहा। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि शब्दों की ताकत और शायरी का जादू आज भी लोगों के दिलों को जोड़ने की ताकत रखता है।