हरदोई जनपद में विकास को तरसता सलेमपुर गांव





रिपोर्टर फारूक क़ुरैशी

अहिरोरी हरदोई:- जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं उत्तर प्रदेश मुखिया योगी आदित्यनाथ जी सबका साथ सबका विकास करने की बात करते हैं वहीं देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी से सटे हुए जिले हरदोई के विकासखंड अहिरोरी के ग्राम पंचायत डही के मजरा ग्राम सलेमपुर में विकास कोसों दूर है यह एक ऐसा गांव है जो मुख्य सड़क मार्ग से मुश्किल से 2 किलोमीटर ही दूर होगा लेकिन गांव के अंदर से मुख्य सड़क मार्ग पर पहुंचना कोई आसान बात नहीं गांव की जमीनी हकीकत ये है ना तो गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए कोई सड़क है और ना गांव को विकसित करने की कोई उम्मीद सड़क के साथ साथ एक और समस्या है जो गांव की मुख्य समस्या है वो है गांव के बाहर से निकली हुए बाहरमासी भड़ायल ड्रेन नहर जिसपे पुल तो दूर की बात एक पुलिया तक नहीं है सोचने वाली बात है कि आजादी से लेकर आज तक ये गांव अछूता कैसे रह गया विगत कुछ माह पूर्व से भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के युवा जिलाध्यक्ष पुनीत मिश्रा ने इस गांव के विकास का मुद्दा उठाया जिसको लेकर उन्होंने दर्जनों ज्ञापन छोटे से लेकर आला अधिकारियों तक को दिए धरना प्रदर्शन भी किया है मौके पे अधिकारी भी आए लेकिन हालात ज्यो की त्यों हरदोई जिले के आला अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन ही दिया लेकिन आज तक ग्राम सलेमपुर और उसमे निवास करके सैकड़ों ग्रामीण विकास की राह देख रहे है लेकिन उन्हें चारो तरफ से अगर कुछ मिल रहा है तो वो है निराशा गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए भी बाहर जाना पड़ता है लेकिन बच्चे जाए तो जाए कैसे जब जाने के लिए दलदल नुमा रास्ता और ड्रेन है तो मासूम बच्चे उसे पार करेंगे भी तो कैसे अगर गांव का कोई बुजुर्ग अपनी बीमारी की दवाई लेने के लिए जिले पर जाने के सोचे तो वो जाएगा कैसे जब जाने के लिए उसे दलदल और नहर से गुजरना पड़ेगा लेकिन शायद जिले से लेकर सत्ता पक्ष में बैठे नेताओ जनप्रतिनिधियों तक को इस ग्राम के निवासियों के दर्द की कोई परवाह नहीं है वहीं जब चुनाव का मौसम होता है तो हर प्रत्याशी गांव के विकास का मुद्दा लेकर बैठ जाता है और गांव के मासूम व्यक्तियों को झूठी उम्मीद दे जाता है लेकिन चुनाव समाप्ति के बाद ना तो विजय हुए प्रत्याशी को इस गांव की याद आती है न इस गांव के लोगो की और गांव के मासूम व्यक्ति हमेशा कि तरह सिर्फ अपने आंसू अपने आप में ही छिपा लेते है या तो ये कहे कि अपने आप को ठगा महसूस करते ग्रामवासी हर बार के चुनाव के बाद खैर बीते कुछ दिन पहले भाकियू जिलाध्यक्ष पुनीत मिश्रा ने ग्राम के बाहर से निकली ड्रेन के पास बुद्धि शुद्धि यज्ञ भी किया था लेकिन शायद अभी तक जिम्मेदारों के बुद्धि की शुद्धि नहीं हो सकी है जो उन्हे इस गांव के दर्द और तकलीफे दिखाई नहीं पड़ें वही भाकियू जिलाध्यक्ष का कहना है कि बार-बार अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देना उनको मामले से अवगत कराना उनकी आदत सी बन गई है जिसे करने से वह बिल्कुल पीछे नहीं हटते हैं उन्होंने कहा है कि यह हमारा बड़ा मुद्दा है इसको छोड़ कर हम किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे सलेमपुर की नहर पर किसान भाइयों एवं ग्राम वासियों के साथ अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी कर रहे हैं अगर उससे भी कोई उचित हल नहीं निकलता है तो आत्मदाह करने पर विवश होना पड़ेगा।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने