रायपुर (छत्तीसगढ़) कहते हैं कामयाब इंसान को किसी नाम की आवश्यकता नहीं होती और कुछ लोग गरीबों और जरुरतमंद लोगों की मदद करना ईशवर की भक्ति से कम नहीं मानते। सोशल मीडिया और इंटरनेट के जमाने में भी आज ऐसे सख्श भी समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं जिसकी परिकल्पना कर पाना नामुमकिन है। जी हां हम आज आपको एक ऐसे शख्स से परिचय कराने जा रहे हैं जो महज 25 वर्ष की उम्र में गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं। गरीब बेटियों की शादी हो या फिर फुटपाथ में भूखे, प्यासे कपड़ों की कमी से जूझकर तंगहाली में अपनी जिंदगी जीने को विवश लोगों के लिए मोहित यादव आज अंधेरी जिंदगियों को रोशन करने में एक दीपक का काम कर रहे हैं। सन 1996 में उत्तर प्रदेश के नोएडा गौतम बुद्ध नगर में जन्मे मोहित यादव महज 25 वर्ष की उम्र में आज लोगों के लिए मिसाल बन गए हैं। वर्तमान समय में दिल्ली में रहकर एक निजी स्टोर का संचालन करने वाले मोहित के पिता सुरजन यादव और माता कमलेश देवी यादव के अलावा दोस्तों से प्रेरित होकर मोहित ने गरीबों की सेवा करना ही अपना धर्म समझा। पिछले 4 से 5 वर्ष पूर्व दो दोस्तों को गरीबों की सेवा करते देख उनके मन में भी गरीबों के प्रति सहानुभूति जाग उठी और उन्होंने तब से ही भूखे और गरीब लोगों की सेवा करने में दिन रात में कोई भी अंतर नहीं समझा। जहां एक और मोहित समाज के पिछड़े तबके के लोगों की सेवा करने में दिन रात एक कर दिया। वहीं जानवरों के प्रति भी उनके मन में अगाध प्रेम देखने को मिल रहा है।
लॉकडाउन के पहले लगभग 10 गरीब बेटियों का कन्यादान कर चुके हैं, इतना ही नहीं विवाह में आने वाले खर्च और विवाह के बाद उन्हें आवश्यकता पड़ने वाले राशन, बर्तन से लेकर रोजमर्रा की तमाम जरूरतों को दोस्तों के साथ मिलकर पूरा करते हैं। मोहित बताते हैं कि उनका स्वयं का इस कार्य में प्रतिमाह लगभग 25 से 30 हजार रुपए खर्च हो जाता है, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि गरीबों की सेवा करना ही वह अपना पहला कर्तव्य मानते हैं। दूसरों को खुशी देने में मोहित को ज्यादा खुशी होती है। दोस्तों के साथ मिलकर उन्हें लोगों की सेवा करने में सुख की अनुभूति होती है और उनके साथ मिलकर हर महीने लगभग 50 हजार से ज्यादा खर्च कर देते हैं। समाज को प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की मदद करना ही सच्चा सामाजिक दायित्व है। मोहित का कहना है कि छोटी छोटी खुशियां हमेशा ही लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है। इससे आने वाली पीढ़ी को भी बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा। यही नहीं मोहित गरीब बच्चों का बर्थ-डे सेलिब्रेट करने स्लम बस्तियों तक पहुंच जाते हैं और उनके साथ उनका जन्मदिन मना कर उन्हें खुशियां प्रदान करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी एनजीओ या संस्था से नहीं जुड़े हैं और ना ही अपनी सेवा कार्य में किसी भी प्रकार का बैनर और पोस्टर का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें गरीबों और जरुरतमंद लोगों की सेवा के लिए किसी पंपलेट, बैनर पोस्टर की आवश्यकता नहीं है।
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