सारंगढ़ । अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के बैनर तले सती रानी दादी विवाह समारोह संपन्न हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ गोपाल जी छोटे मठ मंदिर से अनिल आशा अग्रवाल के द्वारा सती रानी दादी के साथ ही साथ 5 देवों की प्रतिमूर्ति लेकर बाजा गाजा के साथ नगर भ्रमण करते हुए अग्रसेन भवन पहुंचे । शोभायात्रा में लगभग 50 महिलाएं उपस्थित थी , जो हाथों में निशान लिए दादी रानी का जयकारा लगाते हुए अग्रसेन भवन पहुंचे । जहां आशा अनिल अग्रवाल द्वारा विधि विधान के साथ सती रानी दादी की मूर्ति की स्थापना की , गोपाल जी मठ छोटे मठ मंदिर के महंत बंशी मिश्रा के द्वारा विधि विधान के साथ पूजा करवाया गया ।
संगीतबद्ध रूप से रानी सती दादी जी का मंगल पाठ का गायन सुर साम्राज्ञी श्रीमती पूनम शर्मा और उनका साथ दे रही थी श्रीमती आशा अग्रवाल मंगल पाठ के माध्यम से बीच-बीच में भजनों की प्रस्तुति से अग्रसेन भवन का सभागार भक्ति में हो गया । सेंगर श्रीमती पूनम शर्मा अपनी टीम रायगढ़ के वादक दल के द्वारा पूरा माहौल भक्ति रस में डूबोने में सफल रही । मां रानी सती दादी का जन्म कार्तिक शुक्ला नवमी मंगलवार को डोकवा ग्राम में सेठ गुरसामल मां श्रीमती गंगा देवी के घर में हुआ । इनका नाम नारायणी बाई रखा गया । यह बचपन में धार्मिक व सतियों वाला खेल खेलती थी । बड़ी होने पर सेठ जी ने उन्हें धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ शस्त्र शिक्षा व घुड़सवारी की शिक्षा भी दिलाई थी । बचपन से ही इनमें दैविक शक्ती नजर आती थी । जिससे गांव के लोग आश्चर्य चकित थे । नारायणी बाई का विवाह हिसार राज्य के सेठ जालीराम जी के पुत्र तनधन दास के साथ मंगसीर नवमी को हुआ । शहजादे और तनधन दास के बीच घोड़ी को लेकर दुश्मनी हो गई और तनधन दास के हाथ से शहजादा की मौत हुई ।
विदित हो कि - नारायणी बाई की परिवार हिसार छोड़ झुंझुनू आकर बस गए । मंगसीर कृष्णा नवमी मंगलवार प्रातः सुबह बेला में नारायणी बाई विदा हुई । होनी को तो कुछ और ही मंजूर था , इधर नवाब घात लगा कर बैठा था । देवसर के पहाड़ी के पास पहुंचते ही सैनिकों ने हमला कर दिया । तनधन दास इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए । वीरांगना नारायणी चंडी का रूप धारण कर सारे दुश्मनों का सफाया कर दी । लाशों से जमीन को पाट दिया , सारी भूमि रक्तरंजित हो गई । बची हुई फौज भाग खड़ी हुई । इसे देख राणाजी मां नारायणी को शांत होने के लिए प्रार्थना की , मां नारायणी बोली मैं सती होंऊगी तुम जल्दी से चिता तैयार करने के लिए लकड़ी लाओ । नारायणी अपने पति का शव लेकर चीता पर बैठ गई । चूड़ा से अग्नि प्रकट हुई और सती पति लोग चली गई । चिता से देवी के रूप में सती प्रकट हुई और मधुर वाणी से राणा को बोली भस्म को घोड़ी पर रख ले जाना जहां यह घोड़ी रुक जाएगी वही मेरा स्थान होगा । मैं उसी जगह पर जन जन का कल्याण करूंगी । मां ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि - मेरे नाम से पहले तुम्हारा नाम आएगा इसीलिए राणी सती नाम से इस संसार में नारायणी बाई प्रसिद्ध हुई । आरती पश्चात भंडारे की व्यवस्था की गई थी ।
विदित हो कि - कार्यक्रम में 500 से अधिक महिला पुरुष उपस्थित रहे । कार्यक्रम के समापन के दौरान अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के द्वारा महा भंडारा की व्यवस्था की गई थी । जिसमें अशोक केजरीवाल , मनोज केडिया, दीपक अग्रवाल, का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में यशस्वी लोकप्रिय विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जाँगड़े , सरिता गोपाल , श्रीमती मंजू आनंद के द्वारा माता रानी का मत्था टेकी और ज्योत में पंच आहुती दी । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में किनाराम भगवान के संप्रदाय , भगवान श्री राम अवधूत परंपरा के बोईरडीह आश्रम के अघोरी संत शिरोमणि साईं बाबा भी माता रानी के दरबार में मत्था टेके और उन्होंने भी पंच आहुतियां सती रानी दादी के दिए । कार्यक्रम में नगर के गणमान्य प्रतिष्ठित नागरिक अग्रसेन सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष रामदास सुल्तानिया , बनवारी लाल मित्तल के साथ ही साथ अन्य प्रतिष्ठित व्यवसाई उपस्थित रहे । सती रानी दादी के मंगल पाठ में बैठने वाली सभी को प्रदीप टायर की ओर से विशेष गिफ्ट दिया गया ।





